Indian Railways News => Topic started by AllIsWell on Jun 09, 2013 - 12:30:59 PM


Title - जंग जीतने जैसा है तत्काल टिकट हासिल करना
Posted by : AllIsWell on Jun 09, 2013 - 12:30:59 PM

रेलवे ने तत्काल टिकट के खेल से दलालों को दूर रखने की चाहे कितनी भी कोशिश कर ली हो, लेकिन उनका खेल बदस्तूर जारी है। दलालों के चलते टिकट न मिलने का खौफ गोरखपुर और आसपास के जिलों के रहने वाले लोगों पर इतना हावी है कि इसके लिए अपनी जान तक देने पर आमादा हैं। गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पीआरएस पर रोज खून बहता है। किसी का सर फूटता है, तो किसी की टांग टूटती है, लेकिन अपनों से मिलने की ख्वाहिश में लोग रोज अपनी जान दांव पर लगाते चले जा रहे हैं। कमोवेश यह स्थिति देश के हर रिजर्वेशन काउंटर की है।
खाकी वर्दी वाले भी यात्रियों कीइन परेशानियों का फायदा उठा रहे हैं। एक्स्ट्रा इनकम के चक्कर में वे रोज यहां पहुंचकर दलालों की मदद कर रहे हैं। एक महिला ने तो तत्काल टिकट की चाहत में एक दिन आरपीएफ की हिरासत में काटा। इससे पहले कि हम आपको बताएं कि तत्काल के लिए यह खून क्यों बहता है। हम आपको गोरखपुर में रिजर्वेशन के लिए होने वाली मशक्कत से रूबरू करवा दें। गोरखपुर के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम सेंटर के गेट पर रोज रात के 11 बजे से लाइन लगनी शुरू होती है।
उस वक़्त इक्का दुक्का लोग गेट के आसपास मंडराते हैं। कोई रात भर जागता है, तो कोई सड़क पर ही सो जाता है। सुबह 3 बजे से यहां लोग खड़े होकर लाइन लगाना शुरू कर देते हैं। यह सिलसिला सुबह के 6.30 बजे तक चलता है। यह सारी कवायद सिर्फ एक तत्काल टिकट के लिए होती है। ठीक सुबह 6.30 बजे जैसे ही आरपीएफ का एक सिपाही गेट खोलता है। लोग गेट को धक्का मारते हुए ऐसे दौड़ पड़ते है जैसे कि ओलंपिक्स में 100 मीटर की स्प्रिंट रेस में भाग ले रहे हों।

इस रेस में कई बार लोग नीचे गिरतेहैं, लेकिन तत्काल की चाहत में लोग उन्हें कुचल कर आगे निकल जाते हैं। मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं होती सुबह 6.30 से 9 बजे तक खड़े होने के बाद ही टोकन सिस्टम से लोगों को नंबर मिलते हैं। दैनिकभास्कर.कॉम की टीम को जब इस जानलेवा रेस की खबर लगी तो हकीकत जानने की कोशिश की। वहां पहुंचते ही इसका कारण समझ में आ गया।